पूर्वोत्तर के राशन चावल में गड़बड़ी का मामला: FCI के 5 वरिष्ठ अधिकारियों पर गिरी गाज
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के लिए आवंटित चावल की कथित अनियमित बिक्री और हेराफेरी के मामले में भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सहित पांच वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पूर्वोत्तर राज्यों के लिए निर्धारित चावल की बिक्री में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद की गई है।
सूत्रों के अनुसार, 6 जुलाई को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने FCI के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आशुतोष जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके अगले दिन FCI ने तीन अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की। यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस अखबार में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट में सामने आई है।
वर्ष 1994 बैच के भारतीय ऑडिट एवं लेखा सेवा (IA&AS) के अधिकारी जोशी वर्ष 2023 में FCI से जुड़े थे।
इसके अगले दिन FCI ने मुख्यालय, नई दिल्ली में तैनात जनरल मैनेजर अनुपम दुबे, डिप्टी जनरल मैनेजर विकास कृष्णा तथा असिस्टेंट जनरल मैनेजर ब्रह्म प्रकाश को भी निलंबित कर दिया। इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई एक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई है।
जांच में सामने आया कि ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) के तहत दिल्ली क्षेत्र से नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) को चावल की बिक्री में गंभीर अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि सरकारी नीति का उल्लंघन करते हुए चावल की आपूर्ति में गड़बड़ी और कथित रूप से निजी संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए उसका डायवर्जन किया गया।
इस मामले में इससे पहले 25 मई को FCI के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय की जनरल मैनेजर के. पी. आशा को भी निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ जारी आदेश में कहा गया कि उन्होंने सरकारी नीति के दायरे से बाहर जाकर बिना ई-नीलामी के NERAMAC को चावल जारी करने में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बरती।
सूत्रों का दावा है कि असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब लाभार्थियों के लिए निर्धारित चावल को कथित रूप से निजी खरीदारों को बेच दिया गया, जो सरकारी नियमों का उल्लंघन है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों और निजी खरीदारों के बीच मिलीभगत भी हो सकती है।
इसी मामले में NERAMAC ने भी जून महीने में अपने प्रबंध निदेशक भास्कर बरुआ और अतिरिक्त महाप्रबंधक (एग्रीबिजनेस एवं मार्केटिंग) अंजल कुमार दत्ता को निलंबित किया था।
गौरतलब है कि ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) के तहत FCI अतिरिक्त खाद्यान्न को ई-नीलामी के माध्यम से निर्धारित आरक्षित मूल्य पर बेचता है, ताकि बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके और खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित हो। हालांकि, इस मामले में सरकारी नीति के कथित उल्लंघन ने पूरी खरीद और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
