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वैश्विक गेहूं संकट ने भारतीय गेहूं निर्यात के लिए खोले बड़े अवसर

दुनिया भर में गेहूं उत्पादन पर मौसम और भू-राजनीतिक संकट की मार पड़ने लगी है। ऐसे समय में भारत वैश्विक बाजार में एक अहम खिलाड़ी बनकर उभर रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने अनुमान जताया है कि भारत इस साल कम से कम 20 लाख टन गेहूं निर्यात कर सकता है।

यह खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिका में गेहूं उत्पादन 57 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और रूस जैसे बड़े निर्यातक देशों में भी उत्पादन में भारी गिरावट देखी जा रही है।

The Hindu Business Line में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है, भारत सरकार ने मई 2023 से लागू गेहूं निर्यात प्रतिबंध को हाल ही में हटाया है। USDA ने अपनी “Grain: World Market and Trade” रिपोर्ट में भारत के गेहूं निर्यात अनुमान को 2 लाख 50 हजार टन से बढ़ाकर सीधे 20 लाख टन कर दिया है।

दुनिया में घट रहा गेहूं उत्पादन

USDA के अनुसार वर्ष 2026-27 में वैश्विक गेहूं उत्पादन घटकर 819.1 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के रिकॉर्ड 843 मिलियन टन से करीब 25 मिलियन टन कम है।

सबसे बड़ी गिरावट अमेरिका, यूरोपीय संघ, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में देखी जा रही है। अमेरिका में सूखे की स्थिति ने बाजार को और चिंतित कर दिया है। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी गेहूं की कीमतें हाल के दिनों में लगभग 17 डॉलर प्रति टन बढ़ चुकी हैं।

इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें 23 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी गेहूं लगभग 260 डॉलर प्रति टन और यूरोपीय गेहूं 230 डॉलर प्रति टन पर बिक रहा है, जबकि भारतीय गेहूं 270-275 डॉलर प्रति टन के स्तर पर कोट किया जा रहा है।

ईरान संकट और महंगे उर्वरक बढ़ा रहे दबाव

दिल्ली के निर्यातक Rajesh Paharia Jain का कहना है कि ईरान युद्ध और बढ़ते कच्चे तेल व उर्वरक कीमतों ने कृषि जिंसों के बाजार को तेजी की ओर धकेल दिया है। उनका मानना है कि साल की दूसरी छमाही “एग्री-कमोडिटीज का साल” साबित हो सकती है।

ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और कनाडा में उर्वरकों की कमी और लंबे समय तक सूखे मौसम ने वैश्विक अनाज बाजार की तस्वीर बदल दी है। यही वजह है कि भारत के लिए निर्यात के नए अवसर बन रहे हैं।

भारत में रिकॉर्ड उत्पादन पर सवाल

हालांकि भारत सरकार ने इस साल गेहूं उत्पादन 120 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया है, लेकिन रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सर्वे में उत्पादन सरकारी अनुमान से करीब 50 लाख टन कम रहने की संभावना बताई गई है।

इसके बावजूद भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना के तहत 3 करोड़ टन से अधिक गेहूं की खरीद कर ली है, जो पिछले साल से अधिक है।

सरकार ने इस साल गेहूं का MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि मंडियों में फिलहाल कीमतें लगभग ₹2,450 प्रति क्विंटल चल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि USDA की रिपोर्ट के बाद घरेलू बाजार में कीमतों में तेजी आ सकती है।

चावल और मक्का उत्पादन भी घटने की आशंका

USDA ने केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि चावल और मक्का उत्पादन में भी गिरावट का अनुमान लगाया है। वैश्विक चावल उत्पादन 5 मिलियन टन घटकर 537.8 मिलियन टन रह सकता है। भारत में भी चावल उत्पादन 152 मिलियन टन से घटकर 150 मिलियन टन रहने का अनुमान है।

वहीं, वैश्विक मक्का उत्पादन 1.312 अरब टन से घटकर 1.295 अरब टन तक आ सकता है। हालांकि भारत के लिए राहत की खबर यह है कि यहां मक्का उत्पादन बढ़कर 46.5 मिलियन टन तक पहुंच सकता है।

भारत के लिए बड़ा अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति में कमी बनी रहती है और भारत के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहता है, तो देश आने वाले महीनों में एशिया और अफ्रीका के कई देशों के लिए प्रमुख गेहूं आपूर्तिकर्ता बन सकता है।

वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत के किसानों और निर्यातकों के लिए यह एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।

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