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पंजाब में फोर्टिफाइड चावल योजना पर संकट, FRK निर्माताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया; राइस मिलर्स ने भी जताई नाराज़गी

पंजाब की फोर्टिफाइड चावल योजना एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) निर्माताओं ने राज्य के खरीद विभाग द्वारा बीच सत्र में नियम बदलने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। निर्माताओं का आरोप है कि टेंडर जारी होने और अनुबंध आवंटित होने के बाद सप्लाई चेन, आवंटन और भुगतान व्यवस्था में मनमाने बदलाव किए गए, जिससे उद्योग गंभीर संकट में आ गया है।

Kharif Marketing Season (KMS) 2025–26 के लिए सूचीबद्ध पंजाब स्थित FRK निर्माताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सिविल रिट याचिका दायर कर 15 दिसंबर 2025 और 13 जनवरी 2026 को जारी दो सरकारी पत्रों को रद्द करने की मांग की है। इन पत्रों के जरिए, उनके अनुसार, अगस्त 2025 में जारी मूल RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) की शर्तों को बदल दिया गया।

निर्माताओं का कहना है कि RFP के तहत तय किया गया था कि राइस मिलें सीधे FRK निर्माताओं से ऑर्डर देंगी और भुगतान भी सीधे होगा। लेकिन नए निर्देशों में “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर सप्लाई और बाद में विभागीय “रिलीज ऑर्डर” की व्यवस्था लागू कर दी गई, जिससे पूरी प्रणाली में अनिश्चितता फैल गई।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल भारतीय राइस शेलर संघ के प्रमुख पदाधिकारी प्रेम गोयल ने The Indian Express को बताया कि राज्यभर के राइस मिलर्स इन पत्रों से बेहद असंतुष्ट हैं। उन्होंने पारदर्शिता की कमी, असंगत फैसलों और प्रक्रियात्मक देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे मिलिंग सेक्टर पर अनावश्यक वित्तीय दबाव पड़ा है और सिस्टम पर भरोसा कमजोर हुआ है।

गोयल ने यह सवाल भी उठाया कि जब केंद्र सरकार के स्तर पर FRK की कीमतें 5,800 से 6,200 रुपये प्रति क्विंटल हैं, तो पंजाब में यह दर करीब 3,980 रुपये प्रति क्विंटल क्यों रखी गई है। उनके मुताबिक, यह अंतर न सिर्फ सप्लाई को प्रभावित कर रहा है, बल्कि निर्माताओं के लिए घाटे का सौदा भी बनता जा रहा है। उन्होंने “वन नेशन, वन पॉलिसी” की जरूरत पर जोर दिया।

वहीं, याचिका में FRK निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों में बदलाव करना असंवैधानिक है। उन्होंने कोर्ट से पुराने RFP की शर्तों को सख्ती से लागू कराने और बदले गए आदेशों को रद्द करने की मांग की है।

यह मामला न केवल पंजाब की खरीद प्रणाली बल्कि देशभर की फोर्टिफाइड चावल योजना के भविष्य के लिए भी अहम माना जा रहा है। सभी की निगाहें अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

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