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अमेरिका में भारतीय चावल को राहत की उम्मीद: आयात शुल्क घटने से निर्यात को मिलेगी नई रफ्तार

भारतीय चावल निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर प्रस्तावित आयात शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के संकेतों पर उम्मीद जताई है। फेडरेशन का मानना है कि इस कदम से भारतीय चावल को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात में तेज़ी आएगी।

PTI से बातचीत में IREF के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि शुल्क में यह कटौती भारत को थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर खड़ा कर देगी, जहां फिलहाल करीब 19 प्रतिशत आयात शुल्क लागू है।
उन्होंने कहा कि 25 प्रतिशत शुल्क के कारण भारतीय निर्यातकों को कीमत के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ रहा था, लेकिन 18 प्रतिशत पर आने से यह असंतुलन काफी हद तक खत्म हो जाएगा।

इसी तरह, PTI को दिए जवाब में राइसविला ग्रुप के सीईओ सुरज अग्रवाल ने कहा कि यह फैसला भारतीय चावल उद्योग के लिए बेहद अहम है। उनके अनुसार, अब भारतीय चावल अमेरिका जैसे उच्च मूल्य वाले बाजार में समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेगा, जिससे शिपमेंट वॉल्यूम बढ़ने की पूरी संभावना है।

उद्योग को इस बात की भी उम्मीद है कि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर संभावित अमेरिकी पेनल्टी को भी माफ किया जा सकता है। IREF का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो निर्यातकों का भरोसा और मजबूत होगा।

यह सकारात्मक संकेत ऐसे समय आए हैं, जब देश रिकॉर्ड चावल उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। PTI से बातचीत में प्रेम गर्ग ने बताया कि मौजूदा सीजन में भारत का चावल उत्पादन लगभग 149 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों ने बीते वर्षों में उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। उदाहरण के तौर पर, जब अमेरिका में आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया था, तब भी भारतीय चावल के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच अमेरिका को बासमती चावल का निर्यात 1,99,558 टन रहा, जिसकी कीमत 1,749.17 करोड़ रुपये रही। वहीं नॉन-बासमती चावल का निर्यात 40,960 टन रहा, जिसकी कीमत 284.12 करोड़ रुपये आंकी गई।

ईरान के साथ व्यापार को लेकर उठ रही आशंकाओं पर IREF ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलहाल किसी बड़े व्यवधान की संभावना नहीं है। फेडरेशन के मुताबिक, मौजूदा हालात में निर्यात प्रवाह के बने रहने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, अमेरिकी आयात शुल्क में संभावित कटौती को भारतीय चावल उद्योग के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है, जिससे आने वाले महीनों में निर्यात को नई गति मिल सकती है।

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